कुंडली का नौवां भाव

कुंडली का नौवां भाव धर्म भाव और भाग्य भाव होता है |

काल पुरुष की कुंडली के अनुसार इस भाव में धनु राशी होती है जिसके स्वामी बृहस्पति हैं | केतू इस भाव में उच्च और राहू नीच के होते हैं | धनु अग्नि तत्व की राशी है जिसका अर्थ है ऊर्जा यानि ज्ञान का प्रकाश | देवगुरु बृहस्पति इस भाव के स्वामी है जो ज्ञान के प्रतीक हैं इसलिए यह नैतिकता का भाव भी है | यह पिता का भाव भी है | पूर्व जन्म के कर्मों का फल इसी भाव से देखा जाता है | लम्बी धार्मिक यात्राएँ इसी भाव से देखी जाती हैं | उच्च शिक्षा और आध्यात्मिक शिक्षा इसी भाव से देखी जाती है | भगवान् विष्णु का निवास स्थान भी इसी भाव को माना जाता है |

 

 

 

                    प्रथम भाव – जन्म ( भगवान् ब्रह्मा )

 

 

 

 

पंचम भाव – अध्यात्म ( भगवान् शिव )             नवम भाव – धर्म ( भगवान् विष्णु )

यह भाव धर्म त्रिकोण का अंतिम भाव है |

जातक के परिवार कि मानसिक परेशानियाँ इसी भाव से देखी जाती हैं क्योंकि यह भाव दूसरे भाव से आठवाँ भाव है | दूसरा भाव परिवार का और आठवाँ मानसिक परेशानियों का भाव होता है |

छोटे भाई कि पत्नी इसी भाव से देखी जाती है क्योंकि यह भाव तीसरे भाव से सातवाँ है | तीसरा भाव छोटे भाई का और सातवाँ पत्नी का होता है |

माँ के रोग, शत्रु और कर्ज इसी भाव से देखे जाते हैं क्योंकि यह भाव चौथे भाव से छठा भाव है | चौथा भाव माँ का और छठा भाव रोग, कर्ज और शत्रुओं का होता है |

जातक के पौत्र इसी भाव से देखे जाते हैं क्योंकि यह भाव पांचवें भाव से पांचवां है | पांचवां भाव संतान का होता है |

पत्नी का पराक्रम और पत्नी के छोटे भाई बहन इसी भाव से देखे जाते हैं क्योंकि?द्धांत इसी भाव से देखे जाते हैं |