कुंडली का बारहवां भाव

कुंडली का बारहवां भाव व्यय और नुक्सान का होता है | यह कुंडली का अंतिम भाव है | इस भाव को मोक्ष भाव भी कहते हैं | ऋषि मुनियों के अनुसार यह भाव खर्च, व्यय, दया, आध्यात्मिकता, मोक्ष और मृत्यु का भाव है |

काल पुरुष की कुंडली के अनुसार इस भाव में मीन राशी

होती है जिसके स्वामी बृहस्पति हैं | बुध इस राशी में नीच और शुक्र उच्च के होते हैं | जातक के पारिवारिक लाभ इसी भाव से देखे जाते हैं | यह भाव दूसरे भाव से ग्यारहवां है | दूसरा भाव परिवार का और ग्यारहवां लाभ का होता है |

छोटे भाई का व्यवसाय इसी भाव से देखा जाता है | यह भाव तीसरे भाव से दसवां है | तीसरा भाव छोटे भाई का और दसवां व्यवसाय का होता है | माँ का भाग्य इसी भाव से देखा जाता है | यह भाव चौथे भाव से नौवां है | चौथा भाव माँ का और नौवां भाग्य का होता है | संतान की मानसिक परेशानियाँ इसी भाव से देखी जाती हैं | यह भाव पांचवें भाव से आठवाँ भाव है | पांचवां भाव संतान का और आठवाँ भाव मानसिक परेशानियों का होता है | पत्नी के कर्ज, शत्रु और बिमारियाँ इसी भाव से देखी जाती हैं | यह भाव सातवें भाव से छठा भाव है | सातवाँ भाव पत्नी का और छठा भाव कर्ज, शत्रु और मानसिक परेशानियों का होता है | पिता जी के सारे सुख इसी भाव से देखे जाते हैं | यह भाव नौवें भाव से चौथा है | नौवां भाव पिता का और चौथा भाव सुखों का होता है | व्यवसाय में जातक का पराक्रम इसी भाव से देखा जाता है | यह भाव दसवें भाव से तीसरा है | दसवां भाव व्यवसाय का और तीसरा भाव पराक्रम का होता है | बड़े भाई का संचित धन इसी भाव से देखा जाता है | यह भाव ग्यारहवें भाव से दूसरा है | ग्यारहवां भाव बड़े भाई का और दूसरा भाव संचित धन का होता है | यह भाव मोक्ष त्रिकोण का अंतिम भाव होता है | यह भाव जेल यात्रा, शैय्या सुख, हॉस्पिटल, और विदेश यात्रा का भी होता है |