गंडमूल

जैसा कि हम जानते हैं कि कोई न कोई नक्षत्र दो राशियों के मध्य पुल का काम करता है जैसा कि कृतिका नक्षत्र मेष और वृष, मृगशिरा नक्षत्र वृष और मिथुन, और पुनर्वसु नक्षत्र मिथुन और कर्क रशीयों को आपस में जोड़ने का काम कर रहा है परन्तु कर्क और सिंह राशी के बीच कोई भी नक्षत्र इन दोनों राशियों को जोड़ने का काम नहीं कर रहा | कर्क राशी में अश्लेषा नक्षत्र अपने चर पदों के साथ कर्क राशी के 30 अंशों को पूरा कर रहा है और फिर मघा नक्षत्र के साथ सिंह राशी कि शुरुवात हो रही है | यही स्थिति जब कोई नक्षत्र दो राशियों को जोड़ने का काम न करे और एक ही राशी में अपने 13 अंश 20 मिनट के साथ पूर्ण हो तो यह स्थिति गंड मूल की स्थिति होती है | और वह नक्षत्र जो एक राशी में अपने पूर्ण अंश के साथ समाप्ति करता है या किसी भी राशी की शुरुवात अपने पूर्ण अंश के साथ करता है | वह नक्षत्र गंड मूल का नक्षत्र होता है | जैसा कि कर्क राशी में अश्लेषा और सिंह राशी में मघा अपने पूर्ण अंशों के साथ है | इसलिए अश्लेषा और मघा दोनों ही नक्षत्र गंड मूल के नक्षत्र हैं |

यह स्थित 120 अंश, 240 अंश और 360 अंश पर बनती है | जिस प्रकार यह स्थिति कर्क राशी और सिंह राशी में बनती है उसी प्रकार यही स्थिति वृश्चिक राशी और धनु राशी में और मीन राशी और मेष राशी में भी बनती है |

वृश्चिक राशी में ज्येष्ठा नक्षत्र अपने पूर्ण अंशों के साथ इस राशी में समाप्ति कर रहा है और धनु राशी में मूल नक्षत्र अपने पूर्ण अंशों के साथ शुरुवात कर रहा है | इसलिए ज्येष्ठा और मूल दोनों ही गंड मूल के नक्षत्र है |

इसी प्रकार मीन राशी में रेवती नक्षत्र अपने पूर्ण अंशों के साथ समाप्ति कर रहा है जबकि मेष राशी में अश्वनी नक्षत्र अपने पूर्ण अंशों के साथ शुरुवात कर रहा है | इसलिए रेवती और अश्वनी भी गंड मूल के ही नक्षत्र हैं |

इसलिए गंडमूल के नक्षत्र है :-

अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती और अश्वनी |

कहते हैं कि अगर चंद्रमा आपकी कुंडली में इन नक्षत्रों में से किसी नक्षत्र में हो तो जातक गंड मूल में पैदा होता है | इसी प्रकार यदि आपकी कुंडली में कोई भी ग्रह इन नक्षत्रों में हो तो वह ग्रह भी गंड मूल  में होता है | आइये अब हम ये समझने कि कोशिश करते हैं कि कुंडली में ये कैसे पता चलेगा कि जातक गंड मूल में है या कोई ग्रह भी गंडमूल में हो सकता है |

जैसा कि हम देख चुके हैं कि गंड मूल के नक्षत्र कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन और मेष राशियों में ही अपने पूर्ण अंशों के साथ या तो शुरुवात करते है या समाप्ति | यहाँ एक बात और समझने वाली है कि कर्क, वृश्चिक और मीन जल तत्व कि राशियाँ हैं और मेष, सिंह और धनु अग्नि तत्व की | इससे एक बात तो स्पष्ट है कि गंड मूल के नक्षत्र या तो जल तत्व या फिर अग्नि तत्व की राशियों में ही होते हैं |

अब कुंडली में ये देखिये कि चंद्रमा किस राशी में है | क्या वो जल तत्व या अग्नि तत्व की राशियों में तो नहीं | यदि है तो जातक गंड मूल में हो सकता है | इस बात को और बारीकी में समझने की कोशिश करते हैं | अगर चंद्रमा जल तत्व कि राशियों कर्क, वृश्चिक और मीन में हो और उसके अंश यानि डिग्री 16 अंश 40 मिनट से ज्यादा हों तो चंद्रमा इन नक्षत्रों में होता है यानि जातक गंडमूल में होगा | इसी प्रकार यदि चंद्रमा अग्नि तत्व की राशियों मेष, सिंह और धनु में है और उसके अंश यानि डिग्री 13 अंश 20 मिनट या उससे कम हैं तो भी चंद्रमा इन नक्षत्रों में होगा अर्थात जातक गंड मूल में होगा | इसी प्रकार कोई भी ग्रह जल तत्व की राशियों में 16 अंश 40 मिनट या उससे अधिक अंशों में हो और अग्नि तत्व की राशियों में 13 अंश 20 मिनट या उससे कम अंशों में हो तो वह ग्रह भी गंड मूल में होगा | समझने वाली बात ये है कि यदि चंद्रमा गंड मूल में हो तो जातक को गंड मूल में पैदा हुआ माना जाता है परन्तु यदि कोई ग्रह गंड मूल में हो तो वह ग्रह अपने प्रभाव को सही ढंग से नहीं दे पाता |