कुंडली का प्रथम भाव  

कुंडली का प्रथम भाव तन भाव कहलाता है | इस भाव से जातक को जन्म से मिलने वाली सभी वस्तुओं, रिश्तों, और विरासत को देखा जाता है | इस भाव को लग्न भाव भी कहा जाता है | केंद्र भाव, त्रिकोण भाव भी इसी भाव को कहा जाता है | काल पुरुष कि कुंडली के अनुसार इस भाव की राशी मेष है | जिसके स्वामी मंगल होते हैं | सूर्य इस भाव में उच्च तथा शनि नीच के होते हैं | बुध तथा बृहस्पति इस भाव में दिग्बली होते हैं | इस भाव को भौतिक शरीर तथा शरीर कि बनावट के तौर पर देखा जाता है |

पहले भाव से हम किसी भी व्यक्ति के सबसे महत्वपूर्ण गुणों और उनके जीवन में मुख्य अभिमुखता को जानते हैं। व्यक्तित्व लक्षण और गुण, जीवन के लिए सामान्य दृष्टिकोण और खुद को व्यक्त करने के लिए पहले घर से देखा जाता है |

पहले भाव से  आभा, आत्म- मानसिकता,जन्मजात प्रकृति, व्यक्तित्व, लक्षण, परिवर्तन, अहंकार,आत्म सम्मान की प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि, महिमा, सामान्य कल्याण, खुशी, समाज में स्थिति, स्वास्थ्य, रंग,   स्वतंत्रता, व्यक्तिवाद, नवाचार, दीक्षा, जीवन शक्ति, प्रतिस्पर्धात्मक ऊर्जा, दीर्घायु, दुश्मन पर विजय, ताकत, उत्साह, जन्म स्थान, सभी कार्यकलाप जो वर्तमान क्षण में होते हैं, इत्यादि को देखा जा सकता है | पहला भाव दूसरे भाव से बारहवां है | जिसके कारण ये भाव परिवार के नुकसान को भी दिखाता है | क्योंकि दूसरा भाव परिवार का होता है और बारहवां नुकसान का |

 इसी प्रकार इस भाव से छोटे भाई कि आय भी देखी जाती है, क्योंकि यह भाव तीसरे भाव से ग्यारहवां है | तीसरा भाव छोटे भाई बहिन का होता है और ग्यारहवां भाव आय का होता है |

मां का कार्यक्षेत्र भी यही भाव है क्योंकि यह भाव चौथे भाव से दसवां भाव है | चौथा भाव मां का और दसवां भाव कार्यक्षेत्र का होता है |

जातक के बच्चों का भाग्य इसी भाव से देखा जाता है क्योंकि यह भाव पांचवें भाव से नौवां भाव है | नौवां भाव भाग्य का और पांचवां भाव बच्चों का होता है |

कर्जों, शत्रुओं और बिमारियों के कारण होने वाली मानसिक परेशानियों को भी इसी भाव से देखा जाता है क्योंकि यह भाव छठे भाव से आठवां है | छठा भाव कर्जों, शत्रुओं और बिमारियों का होता है और आठवां भाव मानसिक परेशानियों का होता है |

सातवें भाव से सातवाँ होने के कारण इस भाव से प्रेम सम्बन्ध,पार्टनरशिप इत्यादि भी देखे जाते हैं |

पत्नी के परिवार एवं रिश्तेदारों कि बिमारियाँ इसी भाव से देखी जाती हैं क्योंकि यह भाव आठवें भाव से छठा है | आठवां भाव पत्नी के रिश्तेदारों का होता है और छठा भाव बिमारियों का होता है |

जातक के पिता कि शिक्षा इसी भाव से देखी जाती है क्योंकि यह भाव नौवें भाव से पांचवां है | नौवां  भाव पिता का और पांचवां भाव शिक्षा का होता है |

व्यवसाय से मिलने वाले सभी सुख इसी भाव से देखे जाते हैं क्योंकि यह भाव दसवें भाव से चौथा है | दसवां भाव व्यवसाय का और चौथा भाव सुख का होता है | बड़े भाई का पराक्रम भी इसी भाव से देखा जाता है क्योंकि यह भाव ग्यारहवें भाव से तीसरा है | ग्यारहवां भाव बड़े भाई का और तीसरा भाव पराक्रम का होता है | इस भाव को धर्म त्रिकोण का पहला भाव भी कहा जाता है |