कुंडली का दूसरा भाव

कुंडली का दूसरा भाव धन भाव कहलाता है | इस भाव से जातक का कुटुंब भी देखा जाता है | पारिवारिक खुशियाँ, वाणी, चल संपत्ति इत्यादि भी इसी भाव से देखे जाते हैं |

काल पुरुष कि कुंडली के अनुसार इस भाव में वृषभ राशी होती है | जिसके स्वामी शुक्र हैं | चंद्रमा इस राशी में उच्च के होते हैं | कुछ विद्वान इस राशी में राहू को उच्च तथा केतू को नीच मानते हैं | इस भाव को मारक भाव भी कहा जाता है | इस भाव को अर्थ त्रिकोण का पहला भाव भी कहा जाता है | इस भाव को पारिवारिक जिंदगी का भाव भी कहा जाता है | जातक की कमाने कि शक्ति भी इसी भाव से देखी जाती है | यह भाव करियर को तो नहीं दिखाता परन्तु करियर में पैसे की कामयाबी इसी भाव से देखी जाती है | दूसरी शादी दूसरे भाव से ही देखी जाती है | पहली शादी सातवें भाव से देखी जाती है और यह भाव सातवें से आठवां है | हम यहाँ यह कह सकते हैं कि इस भाव से पहली शादी का अंत तथा दूसरी शादी कि शुरुवात कही जा सकती है |

इस भाव को हम लगन के विस्तार के रूप में भी देखते हैं क्योंकि यह भाव पहले भाव से दूसरा है |

छोटे भाई बहन का नुकसान भी इसी भाव से देखा जा सकता है क्योंकि यह तीसरे भाव से बारहवां है | तीसरा भाव छोटे भाई बहन का होता है और बारहवां नुकसान का | मां की आय इसी भाव से देखी जा सकती है क्योंकि यह भाव चौथे भाव से ग्यारहवां है | चौथा भाव मां का और ग्यारहवां भाव आय का होता है |

संतान का व्यवसाय इसी भाव से देखा जाता है क्योंकि यह भाव पांचवें भाव से दसवां है | पांचवां भाव संतान का और दसवां व्यवसाय का होता है | जातक के मामा की किस्मत इसी भाव से देखी जाती है क्योंकि यह भाव छठे भाव से नौवां भाव है | छठा भाव मामा का और नौवां भाव किस्मत का होता है |

पत्नी की आयु और उनकी मानसिक परेशानियाँ इसी भाव से देखी जाती हैं क्योंकि यह भाव सातवें भाव से आठवाँ है | सातवाँ भाव पत्नी का और आठवाँ भाव आयु तथा मानसिक परेशानियों का होता है | इसी तरह सातवाँ भाव शादी का होता है और सातवें से आठवाँ भाव होने के कारण इस भाव से शादी कि आयु भी देखी जा सकती है | जातक के ससुराल के बिज़नस पार्टनर्स भी इसी भाव से देखे जा सकते हैं | क्योंकि यह भाव आठवें भाव से सातवाँ है | आठवें भाव से ससुराल और सातवें भाव से बिज़नस पार्टनर्स देखे जाते हैं |

पिता जी के शत्रु, कर्ज, और उनकी बिमारियाँ इसी भाव से देखी जा सकती हैं क्योंकि यह भाव नौवें  भाव से छठा है | नौवां भाव पिता स्थान होता है और छठा भाव रोग, कर्ज एवं शत्रुओं का होता है |

बड़े भाई के सारे सुख इसी भाव से देखे जाते हैं क्योंकि यह भाव ग्यारहवें भाव से चौथा है | ग्यारहवां भाव बड़े भाई का और चौथा भाव सुखों का होता है | विदेश में जातक का पराक्रम इसी भाव से देखा जाता है क्योंकि यह भाव बारहवें से तीसरा भाव है | बारहवां भाव विदेश का और तीसरा भाव पराक्रम का होता है | यह वाणी का स्थान भी है | विदेशी भाषाओँ का ज्ञान भी इसी भाव से होता है | संचित धन  भी इसी  भाव से देखा जाता है |