कुंडली का तीसरा भाव

कुंडली का तीसरा भाव पराक्रम भाव कहलाता है | इस भाव से छोटे भाई बहन को भी देखा जाता है | विक्रम भाव, शौर्य भाव और सहज भाव इसी भाव को कहा जाता है | इस भाव को उपाचय स्थान और त्रिश्दाय भाव भी कहा जाता है | उपाचय शब्द संस्कृत के उपचय शब्द से लिया गया है जिसका मतलब होता है वृद्धि करना | त्रिशदय भाव अच्छा नही माना जाता | इसके परिणाम अच्छे नही होते जबकि बाधाएँ होने के बावजूद पैसे के मामले में इसके परिणाम अच्छे होते हैं | काम त्रिकोण का यह पहला घर है | अगर इस घर में अशुभ ग्रह हों तो वह विपरीत परिस्थिति में भी संघर्ष करने की क्षमता पैदा करते है तथा शत्रुओं पर विजय हासिल करने तथा उनसे फायदा प्राप्त करने में सहायता करते हैं | काल पुरुष की कुंडली के अनुसार इस भाव में मिथुन राशी होती है जिसके स्वामी बुध हैं | राहू इस राशी में उच्च तथा केतू नीच के होते हैं | इस भाव को कम्युनिकेशन का भाव भी कहा जाता है | इस भाव को विचारों के आदान प्रदान का भाव भी कहा जाता है जिसे जातक बोलकर या लिखकर व्यक्त कर सकता है | इस भाव से पडोसी, छोटी यात्राएँ, बचपन के मित्र, प्रारंभिक शिक्षा, बचपन की शरारतें इत्यादि भी देखे जाते हैं | यह भाव चौथे भाव से बारहवां है इसी कारण  इस भाव से मां का नुकसान भी देखा जाता है | चौथा भाव मां का और बारहवां भाव नुकसान का होता है |

संतान की आय इसी भाव से देखी जाती है क्योंकि यह भाव पांचवें भाव से ग्यारहवां है | पांचवां भाव संतान का और ग्यारहवां आय और लाभ का होता है | मामा की व्यवसाय भी इसी भाव से देखी जाती है क्योंकि यह भाव छठे भाव से दसवां भाव है | छठा भाव मामा का और दसवां भाव व्यवसाय का होता है

| पत्नी की किस्मत इसी भाव से देखी जाती है क्योंकि यह भाव सातवें भाव से नौवां भाव है | सातवाँ भाव पत्नी भाव और नौवां भाव किस्मत का होता है | इसी प्रकार इस भाव से पत्नी के पिता अर्थात जातक के ससुर को भी देखा जाता है क्योंकि नौवां भाव पिता का भी होता है |

इस भाव को आयु का भाव भी कहा जाता है क्योंकि यह भाव आठवें भाव से आठवाँ है | आठवाँ भाव आयु का होता है और भावत भावं के अनुसार आठवें से आठवाँ होने के कारण इसे आयु का भाव कहा जा सकता है | पिता जी के पार्टनर इसी भाव से देखे जाते हैं क्योंकि यह भाव नौवें भाव से सातवाँ है | नौवां

भाव पिता जी का और सातवाँ भाव पार्टनर का होता है | इस भाव से सरकारी नौकरी भी देखी जा सकती है क्योंकि यह भाव दसवें भाव से छठा है | दसवां भाव कर्म स्थान है और छठा भाव सरकारी नोकरी का होता है | इसी प्रकार दसवें से छठा होने के कारण आपके कर्म स्थान पर आपके शत्रु भी इसी भाव से देखे जाते हैं | बड़े भाई की संतान भी इसी भाव से देखी जाती है क्योंकि यह भाव ग्यारहवें भाव से पांचवां है | ग्यारहवां भाव बड़े भाई का और पांचवां भाव संतान का होता है | विदेश में मिलने वाले सारे सुख इसी भाव से देखे जाते हैं क्योंकि यह भाव बारहवें भाव से चौथा है | बारहवां भाव विदेश का और चौथा भाव सुखों का होता है | इसी प्रकार दूसरे भाव से दूसरा होने के कारण भावत भावं के अनुसार यह भाव परिवार के विस्तार और धन के विस्तार का भी होता है | यह भाव जातक को पत्रकार, संपादक, ज्योतिषी, नक्षा-नवीस, गणितज्ञ, पुलिस अधिकारी, एवं सन्देश वाहक बनने में भी मदद करता है |