कुंडली का पांचवां भाव  

पंचम भाव को सुत भाव भी कहते हैं | पहली संतान इसी भाव से देखी जाती है | काल पुरुष कि कुंडली के अनुसार इस भाव में सिंह राशि आती है | जिसके स्वामी सूर्य हैं | इस राशी में कोई भी ग्रह उच्च या नीच के नहीं होते | इस भाव को विद्या का भाव भी कहा जाता है | प्रेम सम्बन्ध भी इसी भाव से देखे जाते हैं | यह भाव बुद्धि का भाव भी है | इस भाव को त्रिकोण भाव भी कहते हैं | संचित धन से मिलने वाले सारे सुख इसी भाव से देखे जाते हैं क्योंकि यह भाव दूसरे भाव से चौथा है | दूसरे भाव से संचित धन और चौथे भाव से सुखों को देखा जाता है |

इस भाव से पराक्रम का विस्तार भी देखा जा सकता है क्योंकि यह भाव तीसरे भाव से तीसरा है | तीसरा भाव पराक्रम का होता है और भावत भावम के अनुसार तीसरे से तीसरा होने के कारण इस भाव से पराक्रम का विस्तार देखा जाता है | अशुभ ग्रह इस भाव में अच्छा फल नही देते | माँ का कुटुम्ब अर्थात जातक का ननिहाल इसी भाव से देखा जाता है क्योंकि यह भाव चौथे भाव से दूसरा भाव है | चौथे भाव से माँ और दूसरे भाव से कुटुंब देखा जाता है | इस भाव से छठे भाव का नुक्सान देखा जाता है क्योंकि यह भाव छठे भाव से बारहवां है | मतलब कर्ज का अन्त, शत्रुओं का विनाश, बिमारियों का अंत इत्यादि |

पत्नी की आय इसी भाव से देखते हैं क्योंकि यह भाव सातवें भाव से ग्यारहवां है | सातवाँ भाव पत्नी का और ग्यारहवां भाव आय का होता है | इसी प्रकार इस भाव से पत्नी का बड़ा भाई भी देखा जाता है क्योंकि ग्यारहवां भाव बड़े भाई का भी होता है | जातक के ससुराल का व्यवसाय भी इसी भाव से देखा जाता है क्योंकि ये भाव आठवें भाव से दसवां है | आठवाँ भाव ससुराल का और दसवां व्यवसाय का होता है |

पिता जी का भाग्य इसी भाव से देखा जाता है | यह भाव नौवें से नौवां है | नौवां भाव पिता जी का और भाग्य दोनों का होता है इसीलिए भावत भावं के अनुसार यह भाव जातक के भाग्य का विस्तार भी देखा जाता है | इसी प्रकार पिता जी के पिता जी अर्थात जातक के दादा भी इसी भाव से देखे जाते हैं |

जातक के व्यवसाय में होने वाली मानसिक परेशानियाँ भी इसी भाव से देखी जाती हैं क्योंकि यह भाव दसवें से आठवाँ है | दसवां भाव व्यवसाय का और आठवाँ मानसिक परेशानियों का है |

यह भाव ग्यारहवें भाव से सातवाँ है इसलिए इस भाव से बड़े भाई कि पाटनी को भी देखा जाता है | ग्यारहवां भाव बड़े भाई का और सातवाँ भाव पत्नी का होता है | विदेश में आपके कर्ज, शत्रु और बिमारियाँ इसी भाव से देखी जाती हैं क्योंकि यह भाव बारहवें भाव से छठा है | बारहवें भाव विदेश और छठा भाव कर्ज, शत्रु और बिमारियों का होता है | पांचवां भाव धर्म त्रिकोण का भी महत्वपूर्ण भाव है |

 पंचम भाव को राजनीति कि दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है | क्योंकि इस काल पुरुष की कुंडली के अनुसार इस भाव कि राशी सिंह होती है जिसके स्वामी सूर्य हैं | सूर्य ग्रहों के राजा हैं और सिंह जंगल के राजा |